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bring success and prosperity through swetark ganesh

22 Mar, 2021 Bring success and prosperity through Swetark Ganesh

Bring success and prosperity through Swetark Ganesh

सफलता एवं समृद्धिदायक श्वेतआर्क गणेश
श्वेतआर्क गणेश जिसे ‘जागृत-गणेश’ भी कहा जाता है। इनकी पूजा से धन, व्यापार, बुद्धि-विकास का लाभ मिलाता है, विघ्न दूर होने लगते हैं तथा समस्त शुभ मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। जिन बच्चों का पढने में मन नहीं लगता हो, एकाग्रता की कमी हो, उनके पेरेंटस को अपने बच्चों से सिद्ध किए गए श्वेतआर्क गणेश की पूजा गणेषजी के मंत्र से करवानी चाहिए। 


ऐसे व्यापारी बंधु जिन्हें मेहनत करने के बाद भी व्यापार में लाभ ना मिलता हो, उन्हें व्यापार स्थल पर श्वेतआर्क गणेश को रखना चाहिए। हमारे कुछेक क्लाइंट जिन्हें संतान प्राप्ती में बाधा आ रही थी, उन्हें श्वेतआर्क गणेश की पूजा करने से कुछ माह बाद ही शुभ समाचार की प्राप्ति हुई है। 
श्वेतआर्क गणेश की पूजा से केतु नामक ग्रह के शुभ फलों में वृद्धि आने लगती है। गणेशजी की आरती में कहा गया है, इनकी पूजा एवं प्रसन्नता से स्वस्थ काया (शरीर), संतान, माया (धन) की प्राप्ती हो जाती है।


आप भी परम-पावन श्वेतआर्क गणेश की पूजा से अपने जीवन के विघ्नों को हटाकर सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कलयुग में दो ही ऐसे देवता हैं, जिनकी पूजा से व्यक्ति को सहजता से धन प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होने लगता है या यूं कह लें इन दोनों देवताओं की पूजा से लक्ष्मीजी प्रसन्न होने लगती हैं, वह हैं- श्री हरिविष्णुु और दूसरे हैं श्रीगणेश  


इसके अलावा, सनातन धर्म में गणेशजी को प्रथम पूजनीय माना गया है। आप ईस्वर के किसी भी स्वरूप की पूजा क्यों ना करते हो, आपको सर्वप्रथम गणेशजी को प्रसन्न करना पडेगा। प्रथम पूजनीय, के अलावा गणेशजी को समस्त गणों का अध्यक्ष भी माना गया है, यही कारण है ऊपरी नकारात्मक शक्तियाँ उस साधक से दूर ही रहती हैं, जो गणाध्यक्ष अर्थात गणेशजी की पूजा करता है। 


हमारा गत कई वर्षों का अध्ययन है ‘डिवाइन हीलिंग केयर’ के माध्यम से जिस किसी भाई अथवा बहन ने श्वेतआर्क गणेश मंगवाकर, उनकी श्रद्धा भाव से पूजा की, उनके धीरे-धीरे काम बनते चले गए। इसका पूरा श्रेय जाता है हमारी संस्था के पंडितगणों को, क्योंकि वे विषेष मुर्हत में ही पौधे की जड से इन्हें निकालकर सिद्ध करते हैं। उल्लेखनीय है कि जड प्राप्ती एवं इसे सिद्ध करने की पूरी प्रक्रिया में उन्हें तीन महीने तक लग जाते हैं। 
कहा गया है ‘श्रद्धावान लभते ज्ञानम्’ अर्थात श्रद्धावान व्यक्तियों को ज्ञान प्राप्त होता है, सही कर्म करने का ज्ञान। और सही कर्म से ही फिर लाभ एवं सफलता का मार्ग प्रषस्त होता है। इसलिए ‘श्रद्धा’ ज्ञान, लाभ और सफलता तीनों का मार्ग प्रशक्त करती है। अतः ईस्वरीय का रूप, चित्र, मूर्ति, यंत्र इत्यादि में जैसी एवं जितनी अधिक आपकी श्रद्धा होगी, फल आपको उसी अनुपात में प्राप्त होते हैं।

श्वेतआर्क गणेष के संबंध में पूछे जाने वाले मुख्य प्रश्नों का उत्तर भी यहां दिया जा रहा है-


कहाॅं रखेंः श्वेतआर्क गणेश को घर के पूजा स्थान अथवा अन्य किसी साफ स्थान पर टेबिल पर लाल कपडा बिछाकर रखना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि गणेशजी का मुंह उत्तर दिशा की तरफ हो।


पूजाः श्वेतआर्क गणेश को सुबह-शाम जिस प्रकार घर में दिया बत्ती की जाती है, उस समय इन्हें भी धूप दीप दिखानी चाहिए। बुधवार चूंकि गणेशजी का दिन होता है इस दिन इन्हें लडडू एवं दुर्वा अर्पित करनी चाहिए। सप्ताह के अन्य दिनों में भी यह अर्पित किया जा सकता है। पूजा के उपरांत लडडू को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। सुबह अथवा शाम अथवा दोनों समय, यदि आप इनकी आरती करते हैं, तो सोने पर सुहागा होगा।


मंत्रः सुबह-शाम श्वेतआर्क गणेश के सामने गणेशजी के मूलमंत्र ओम गं गणपत्यै नमः का यथाशक्ति जाप करने से मात्र से गणेशजी प्रसन्न हो जाते हैं। हमारे शरीर में जो चक्र पाये जाते हैं, उनमें गणेशजी का स्थान मूलाधार चक्र है अतः गणेशजी के पूजन से धीरे-धीरे यह चक्र जागृत होने लगता है।


घर से बाहर जाने परः यदि आप घर बंद करके कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं, तो संबंधित स्थान से ही सुबह-शाम मानसिक आधार पर इनकी पूजा की जा सकती है। 


लाल सिंदूर एवं फूलः गणेशजी को लाल रंग का फूल एवं लाल सिंदूर प्रिय है। अतः इनके समझ एक पात्र अथवा कटोरी रखकर एक चुटकी सिंदुर एवं फूल इन्हें अर्पित किया जा सकता है तथा कटोरी के इस सिंदूर को आप स्वयं एवं परिवार के सदस्यों को लगाया करें।


जनेऊः गणेशजी को जनेऊ भी अर्पित की जाती है। बुधवार अथवा जब भी आप विधि-विधान से इनकी पूजा करना चाहें, तो इन्हें आप जनेऊ भी अर्पित कर सकते हैं। बाद में, इस जनेऊ को आप गणेशजी का आषीर्वाद स्वरूप धारण कर सकते हैं।


श्रीफलः बुधवार के दिन श्वेतआर्क गणेश को श्रीफल का भोग लगाकर, बाद में उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने पर धन की प्राप्ति के योग बनते हैं।


श्रृंगारः साल में एकाध बार अथवा अपनी सुविधानुसार चतुर्थी तिथि अथवा बुधवार के दिन गणेशजी को नया वस्त्र एवं मुकुट पहनाया जा सकता हैै।


पाठः श्वेतआर्क गणेशजी के समक्ष अर्थवषीर्ष अथवा गणेष नामावली का पाठ करने के मनोकामना षी१्र पूरी होती है।


खंडित हो जाने परः श्वेतआर्क गणेशजी की मूर्ति यदि किसी कारण से खंडित हो जाए, तो उसे नदी अथवा तालाब के साफ पानी में विर्सजित कर देना चाहिए।


बरकतः यदि आप चाहते हैं कि आपके धन में बरकत रहे, तो आपको सेलेरी अथवा गल्ले का धन लाकर गणेशजी के सामने रखना चाहिए तथा उसके बाद संबंधित धन को उपयोग में लेना चाहिए। आप पायेंगे कि धन में बरकत होने लगी है तथा धन का मार्ग प्रशक्त हो रहा है।


कितनी गणेश मूर्ति हो घर मेंः घर में गणेषजी की तीन मूर्ति नहीं होनी चाहिए। तीन से कम अथवा तीन से अधिक मूर्ति रखी जा सकती है |


विशेष दिनः चतुर्थी जिसे संकटा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, इसके अलावा बुधवार, पूर्णिमा का विषेष दिन गणेशजी की पूजा के लिए खास माना गया है। हालांकि श्रद्धा के साथ गणेशजी की पूजा तो कभी भी की जा सकती हैै।


वस्त्रः हमें स्वयं को गणेश पूजा के समय लाल, पीले, सफेद अथवा उजले रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए। काले रंग के वस्त्र पूजा के दौरान नहीं पहनने चाहिए।


तुलसी ना चढाएंः गणेशजी को तुलसी नहीं चढाई जाती है, इसका ध्यान रखना चाहिए । 

आप भी परमपावन श्वेतआर्क गणेश की पूजा से अपने जीवन के विघ्नों को दूर कर तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। इसके लिये डिवाइन हीलिंग केयर के नंबर +91 9316258163 पर संपर्क किया जा सकता हैं।

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